कार की विंडशील्ड के किनारों पर ये ब्लैक डाट्स हैं बड़े काम की चीज़, जानिए क्यों?

तेज़ी से विकसित हो रहे भारत में आज हर कोई कार लेने की कवायद में लगा रहता है क्योंकि आजकल इसको एक स्टेटस सिंबल की नजर से देखा जाता है। वैसे तो आपने हर छोटी बड़ी कार देखी होगी और आपने कार की विंडशील्ड पर बने काले डॉट्स भी देखे होंगे। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा कि कार की विंडशील्ड पर ये काले डॉट्स आखिर क्यों बने होते हैं? तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके पीछे की पूरी कहानी:

सबसे पहले आपको बता दें कि कार की विंडशील्ड के किनारों पर सेरामिक पेंट (Ceramic Paint) लगा होता है जिसे फ्रिट (Frit) कहा जाता हैं। इस पेंट का काम है कार की विंडशील्ड को कार से जोड़े रखना और इसकी वजह से ही विंडशील्ड अपनी जगह पर मजबूती से टिकी रह सकती है। ये जानना भी दिलचस्प होगा कि जब भी ये विंडशील्ड बनते हैं तो सबसे पहले शीशे को गर्म किया जाता है और ओवन में इसके आकार को निर्धारित किया जाता है। इसके बाद सेरामिक पेंट गरमी की वजह से फैलने लग जाता हैं। आसान भाषा में अगर इसे कहें तो जब भी विंडशील्ड बनाने में लगने वाला शीशा ओवन में गर्म होकर फैलने लगता है तो ये काले डॉट्स इसे जोड़े रखने में सहायक होते हैं। इसके साथ ही ये ग्लू (adhesive) को सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाने में भी मदद करते हैं।

यही वजह है कि कारों में एक विंडशील्ड के किनारे ‘फ्रिट’ नामक सिरेमिक पेंट का एक काला बैंड होता है जो विंडशील्ड को अपनी जगह बने रहने में मदद करता है। अगर ये ना हो तो आपकी कार की विंडशील्ड ज़्यादा देर तक आपका साथ नहीं दे पाएगी। इसके अलावा, यह विंडशील्ड के किनारे पर गोंद को कवर करने में भी मदद करता है और इस तरह से कार की शोभा बढ़ाने का भी काम करता है। तो अगली बार जब भी आप कार की विंडशील्ड पर बने काले डॉट्स देखें तो समझ लीजिए कि ये कार की विंडशील्ड और आपकी सुरक्षा के लिए कितने ज़रूरी हैं। किसी हादसे की स्थिति में विंडशील्ड की मजबूती आप की जान बचा सकती है।

इसके अलावा भी कार के कुछ ऐसे फीचर होते हैं जिनको जानना दिलचस्प होगा। इन फीचर्स में हैं- चमड़े की सीटें, सनरूफ / मूनरूफ और गर्म सीटें। कार के ये सब फीचर्स बदलती टेक्नोलॉजी और मांग के अनुसार ही हैं। इसके अलावा, सुरक्षा की दृष्टि से एक बैकअप कैमरा भी एक मज़ेदार फीचर है। यह बात भी गौरतलब है कि मई 2018 के बाद से निर्मित सभी कारों को बैकअप कैमरे के साथ लांच किए जाने की ज़रूरत है।

बैकअप कैमरा (जिसे रिवर्सिंग कैमरा या रियर-व्यू कैमरा भी कहा जाता है) एक विशेष प्रकार का वीडियो कैमरा है, जिसमें आप अपनी सीट पर बैठे बैठे इस कैमरे से पीछे आने जाने वाली गाड़ियों को देख पाएंगे। यह ख़ास तौर से बैकअप टक्कर से बचने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बैकअप कैमरे आमतौर पर गाड़ी के हेड यूनिट डिस्प्ले से जुड़ा होता है।

इसके बाद बारी आती है नेविगेशन सिस्टम की, जिसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमें लगा GPS सिस्टम आपको आपकी मंज़िल की एकदम सटीक लोकेशन बताएगा। जहां तक बात है रिमोट सेंसिंग की, तो आजकल लांच होने वाली कारों में ये फीचर पहले से ही मौजूद होता है। नई कारों में, रिमोट स्टार्ट में अक्सर एक स्मार्टफोन ऐप (सदस्यता के साथ) शामिल होता है जो सिर्फ सेलुलर कनेक्शन के साथ कहीं से भी कार को स्टार्ट कर सकता है।

तो इस तरह से कार के ये नए फीचर्स आपके सफ़र को और भी आरामदायक और आसान बना देंगे।


सत्यव्रत का मानना है कि टेक्नॉलजी का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना जानेंगे. इसी के चलते उन्होंने टेक जर्नलिस्ट बनने का फैसला लिया. सत्यव्रत ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की थी, साल 2015 में वह ज़ी न्यूज़ से जुड़े. वह न केवल टेक को अच्छी तरह से समझते हैं बल्कि यह भी जानते हैं कि कौन सी स्टोरी पाठकों को ज्यादा पसंद आती हैं. अब सत्यव्रत Mysmartprice से जुड़े हैं. और यहां भी उनका मकसद हर रोज बदल रही टेक्नॉलजी की दुनिया की हर बारीकी को आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाना है.