Maruti Swift और Renault Duster क्रैश टेस्ट हुईं फेल, नतीजे होश उड़ा देंगे

देश में कारों की सेफ्टी को लेकर अब सरकार के साथ ग्राहक भी काफी सचेत हो गये हैं। हर कोई यही चाहता है कि उसकी कार सेफ हो। अक्सर क्रैश टेस्ट से कारों की सेफ्टी को टेस्ट किया जाता है, कई कारें तो बेहतर नंबर पाती है  जबकि काफी कारें ऐसी हैं जो इस टेस्ट में फेल हो जाती हैं। वैसे सही मायनों में कारें सेफ्टी रेटिंग के मामले बेहतर ही होने चाहिए। मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki Swift) और रेनो डस्टर (Renault Duster)  इन दोनों कारों का हाल ही में क्रैश टेस्ट हुआ और आपको जानकर हैरानी होगी कि ये दोनों गाड़ियां टेस्ट में फेल हो गई हैं। ये दोनों ही गाड़ियां भारत में काफी पॉपुलर हैं। लेकिन ये दोनों ही कारें ग्लोबल एनसीएपी के दक्षिण अमेरिकी सहयोगी लैटिन एनसीएपी क्रैश टेस्ट में फेल हो गई हैं, इन दोनों कारों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।

स्विफ्ट (Swift) और डस्टर (Duster) दोनों के ही क्रैश टेस्ट एजेंसी के लैटिन अमेरिकी और कैरीबियाई न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम के तहत किए गए थे। इस क्रैश टेस्ट के बाद नतीजे बेहद चौंकानें वाले रहे। दोनों ही कारों ही को सेफ्टी के मामले में जीरो स्टार (Zero Star) मिले हैं। बड़ी बात यह है कि zero star मतलब यह होता है कि इन कारों को चलाने के दौरान अगर ये एक्सीडेंट का शिकार होती हैं तो इनमें बैठे हुए लोगों को गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है। 

जानकारी के लिए बता दें कि मेड-इन-इंडिया सुजुकी स्विफ्ट,  जापान में भी निर्मित होती है, मानक के रूप में इसमें दो एयरबैग थे। क्रैश टेस्ट के लिए इस्तेमाल की गई Swift लगभग सभी कैटेगरी में कमजोर ही रही। इसने एडल्ट ऑक्यूपेंट बॉक्स में 15.53 प्रतिशत, चाइल्ड ऑक्यूपेंट बॉक्स में 0 प्रतिशत, पैदल यात्री सुरक्षा और कमजोर सड़क उपयोगकर्ता बॉक्स में 66.07प्रतिशत  और सेफ्टी असिस्ट बॉक्स में 6.98 प्रतिशत  स्कोर किया। लैटिन एनसीएपी के मुताबिक स्विफ्ट का क्रैश टेस्ट न केवल हैचबैक के लिए, बल्कि इसके सेडान संस्करणों के लिए भी मान्य है।

क्रैश टेस्ट के लिए इस्तेमाल किए गए डस्टर मॉडल में डुअल एयरबैग और ईएससी स्टैंडर्ड थे। इसने एडल्ट ऑक्यूपेंट बॉक्स में 29.47प्रतिशत , चाइल्ड ऑक्यूपेंट बॉक्स में 22.93प्रतिशत , पैदल यात्री सुरक्षा और कमजोर सड़क उपयोगकर्ता बॉक्स में 50.79प्रतिशत  और सेफ्टी असिस्ट बॉक्स में 34.88प्रतिशत  हासिल किया। सेफ गाड़ियां ग्राहकों का अधिकार है, सवाल यह है कि ऑटो कंपनियां आखिर इतनी कमज़ोर कारें क्यों बनाती हैं।  

उम्मीद की जा रही है कि इस रिपोर्ट के बाद ऑटो कंपनियां अपनी कारों को बेहतर करेंगी और लोगों को सेफ कारें देंगे। लेकिन जिस बजट में ये दोनों कारें मार्केट में उपलब्ध हैं उस कीमत में और भी ऑप्शन मौजूद हैं जो सेफ है और अच्छी रेंटिंग के साथ आती हैं।