क्या सिग्नल बूस्टर नेटवर्क की समस्या को खत्म कर सकता है? जानें

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में टेक्नोलॉजी ने नई क्रांति ला दी है। इसने ना केवल हमारी ज़िन्दगी को आसान किया है बल्कि मोबाइल क्रांति की वजह से हमें दुनिया के हर कोने की ख़बर पल भर में मिल जाती है। लेकिन जहां एक तरफ़ विकसित शहरों में आप इस टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल कर सकते हैं, वहीं ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अभी भी लोग कमज़ोर सिग्नल की वजह से इस मोबाइल क्रांति का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। तो ऐसे में सेल फोन सिग्नल बूस्टर उन्हें इस टेक्नोलॉजी का पूरा फायदा दिलाने में सक्षम हैं। लेकिन गाहे-बगाहे हम अक्सर लोगों से या तो शिकायतें या संशय सुनते रहते हैं कि क्या ये वास्तव में काम करते हैं? तो इसका तर्क है कि जब तक कि सिग्नल स्ट्रेंथ अच्छी है, ये घरों, कार्यालयों और गाड़ियों में उस सिग्नल को 32 गुना तक बढ़ाकर ज़बरदस्त सर्विस प्रदान करते हैं।

लेकिन बदकिस्मती से, बाजार में मिलने वाले कई सेलुलर फोन सिग्नल बूस्टर वैसा काम नहीं करते जैसे कि उनका विज्ञापन किया जाता है। इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि सिग्नल बूस्टर सिर्फ़ तभी काम करेगा जब कॉल करने के लिए आपके घर या आफिस में पर्याप्त सिग्नल स्ट्रेंथ हो। बिना किसी सिग्नल के, कोई भी सेलफोन बूस्टर काम नहीं कर पाएगा।

सिग्नल स्ट्रेंथ कम क्यों हो जाती है?
आमतौर पर, कॉल ड्रॉप और कम इंटरनेट स्पीड जैसी समस्याएं हमें दूर-दराज के इलाकों में देखने को मिलती हैं जिसकी बड़ी वजह है ऐसे इलाकों में मोबाइल टावर का ना होना या बहुत दूर होना। कई ग्रामीण इलाकों में कम आबादी होने की वजह से वहां सेल्यूलर कम्पनियां मोबाइल टावर लगाने से कतराती हैं क्योंकि यह घाटे का सौदा साबित हो सकता है।

इसके अलावा चर्च जैसी पुरानी इमारतें अक्सर मोबाइल सिग्नल में रुकावट डालती हैं। दरअसल, कोई भी इमारत जिसको बनाने में कंक्रीट और धातु का इस्तेमाल होता है, मोबाइल सिग्नल को कमज़ोर करती है। शहरी इलाकों में भी (जिनमें आमतौर पर सिग्नल स्ट्रेंथ अच्छी रहती हैं), ज़्यादा वेव्स के मिल जाने के कारण एक “डेड ज़ोन” बन सकता है जहां पे आपके मोबाइल की सिग्नल स्ट्रेंथ ना के बराबर होगी।

सिग्नल बूस्टर कैसे बढ़ाता है सिग्नल स्ट्रेंथ?

तो ये जानना काफ़ी दिलचस्प होगा कि आखिर सिग्नल बूस्टर सिग्नल स्ट्रेंथ को बढ़ाता कैसे है। दरअसल, सिग्नल स्ट्रेंथ बढ़ाने के पीछे विज्ञान काम करता है। एक हाई गेन एंटीना का उपयोग करना या एंटीना और दोनों तरफ घूमने वाले सिग्नल बूस्टर सिस्टम का संयोजन डेटा और कॉल दोनों के लिए सिग्नल स्ट्रेंथ को बढ़ाने में मददगार साबित होता है।

सिग्नल बूस्टर के काम को समझने का पूरा मेकानिजम हम दो भागों में विभाजित कर सकते हैं:

भाग 1:
इस मेकानिजम का पहला भाग है- स्ट्रांग सिग्नल प्राप्त करना। सबसे पहले हाई गेन एंटेना दूर या कमजोर सेलुलर सिग्नल को सिग्नल बूस्टर में भेजता हैं। बूस्टर इस सिग्नल की स्ट्रेंथ बढ़ाता है और सेलुलर फोन और अन्य उपकरणों द्वारा उपयोग के लिए उन्हें ट्रांसमिट करता है।

भाग 2:
इस मेकानिजम का दूसरा भाग है- सेल टॉवर पर स्ट्रांग सिग्नल वापिस संचारित (ट्रांसमिट) करना। आपको बता दें कि एक सेल फोन में ट्रांसमिशन पावर सीमित ही होती है, जिससे यह मोबाइल संचार का सबसे कमज़ोर हिस्सा होता है। दोनों तरफ घूमने वाले सिग्नल बूस्टर का इस्तेमाल करते समय ज़्यादा स्ट्रेंथ वाले सिग्नल को सेल टॉवर पर ज़्यादा दूरी तक ब्रॉडकास्ट किया जा सकता है।

तो इस तरह से सिर्फ एक मोबाइल बूस्टर से हम संचार क्रांति का पूरा फ़ायदा उठा सकते हैं।


सत्यव्रत का मानना है कि टेक्नॉलजी का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना जानेंगे. इसी के चलते उन्होंने टेक जर्नलिस्ट बनने का फैसला लिया. सत्यव्रत ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की थी, साल 2015 में वह ज़ी न्यूज़ से जुड़े. वह न केवल टेक को अच्छी तरह से समझते हैं बल्कि यह भी जानते हैं कि कौन सी स्टोरी पाठकों को ज्यादा पसंद आती हैं. अब सत्यव्रत Mysmartprice से जुड़े हैं. और यहां भी उनका मकसद हर रोज बदल रही टेक्नॉलजी की दुनिया की हर बारीकी को आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाना है.