Zoom अकाउंट को करना चाहते हैं सिक्योर, तो जानें कैसे कर सकते हैं 2FA फीचर का इस्तेमाल

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (video conferencing)के लिए आज भी जूम ऐप (Zoom app) का खूब इस्तेमाल होता है। लेकिन सिक्योरिटी ब्रीचेज आज के दौर में बड़ा मसला है। ऐसे में जूम (Zoom) के साथ भी 2 फैक्टर ऑथेंटिकेशन (Two-Factor Authentication) फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे स्कूल-कॉलेज की ऑनलाइन क्लासेज या फिर मीटिंग्स के दौरान होने वाली security breaches को रोका जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे जूम ऐप पर 2 फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) फीचर को इनेबल किया जा सकता है।

ऐसे कर सकते हैं 2FA को इनेबल
जूम ऐप में Two-Factor Authentication के लिए आप चाहें, तो कई सारे मेथड को चुन सकते हैं। इसके लिए SAML, OAuth और पासवर्ड-बेस्ड ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। 2FA फीचर को इनेबल करने के लिए आपको कुछ स्टेप्स को फॉलो करना होगा…

  • इसके लिए जूम ऐप में आपको सबसे पहले जूम डैशबोर्ड (Zoom dashboard) पर साइन-इन करना होगा।
  • इसके बाद आपको नेविगेशन मैन्यू में जाना होगा, फिर यहां पर आपको सिक्योरिटी का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करने के बाद आपको एडवांस्ड वाले ऑप्शन पर जाना होगा।
  • अब आपको यहां पर यह सुनिश्चित करना होगा कि आप 2FA के साथ साइन-इन करना चाहते हैं।
  • इसके बाद आपको यहां पर अकाउंट के साथ इस फीचर के इस्तेमाल से जुड़े कुछ विकल्प मिलेंगे। आपको देखना होगा कि कौन-सा तरीका आपके लिए ज्यादा सहज हो सकता है।
  • अगर आप अलग-अलग ग्रुप्स के लिए 2FA का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो फिर यहां पर आपको स्पेसिफिक ग्रुप्स के यूजर के लिए 2FAको इनेबल करने वाले विकल्प को चुनना होगा।
  • आप स्पेसिफिक भूमिका वाले यूजर्स के लिए भी 2FA का इस्तेमाल कर सकते हैं, इसके लिए Enable 2FA for roles with the specified roles वाले ऑप्शन को सलेक्ट करना होगा।
  • एक बार जब ऑप्शन को सलेक्ट करते हैं, तो फिर सेव बटन पर टैप कर कंफर्म कर दें।

कर सकते हैं ऑथेंटिकेशन ऐप्स का यूज
अगर आप चाहें, तो 2 फैक्टर ऑथेंटिकेशन के लिए कुछ ऐप्स को भी आजमा सकते हैं। इसमें टाइम-बेस्ड वन-टाइम पासवर्ड (TOTP) की सुविधा होती है। इसके लिए Google Authenticator, Microsoft Authenticator और FreeOTP जैसे ऐप्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसमें एसएमएस के जरिए कोड भेजा जाता है या फिर वॉयस कॉल का उपयोग भी कर सकते हैं। इसके बाद लॉग-इन के लिए पासवर्ड के साथ कोड का इस्तेमाल भी करना पड़ेगा। इससे ऑर्गेनाइजेशन को संवेदनशील डाटा को लीक होने से रोकने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह किसी भी बाहरी व्यक्ति को ऑनलाइन क्लासेज में एंट्री करने से रोकेगा।