Fake ID से लिया सिम कार्ड या किया OTT रजिस्ट्रेशन तो होगी जेल या 50 हजार जुर्माना, जान लें ये काम की बात

पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन फ्रॉड के कई मामले सामने आए हैं। इन फर्जीवाड़ों को ध्यान में रखते हुए Department of Telecommunications ने एक नया तरीका निकाला है

भारत पहले की तुलना में काफी स्मार्ट बन गया है, परन्तु इसी के साथ-साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन फ्रॉड के कई मामले सामने आए हैं। इन फर्जीवाड़ों को ध्यान में रखते हुए जिस प्रकार देश का केंद्रीय बैंक RBI बैंकिंग फ्रॉड से अपने ग्राहकों को बचाने के लिए बैंक से जुड़े नए नियम या बदलाव करता है। ठीक उसी तरह अब भारत के Department of Telecommunications (DoT) ने ऑनलाइन धोखाधड़ी गतिविधियों और अन्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के मकसद से एक नया तरीका निकाला है।

क्या है DoT का नया तरीका ?

दरअसल, आज देश में नया सिम कार्ड लेने या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करने वाले बहुत से फर्जी लोग मौजूद है। जो न केवल फर्जी डाक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके सिम कार्ड खरीदते है, साथ ही इसका गलत इस्तेमाल भी करते है। वहीं,  कुछ लोग ऐसे भी है जो OTT प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर भी फर्जी तरह से कर लेते है। पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रहे इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के मकसद से Department of Telecommunications (DoT) ने जुर्माने का प्रवधान निकाला है। जिसमें यदि कोई नया सिम कार्ड लेने के लिए (Fake Id ) नकली दस्तावेज जमा करता है या WhatsApp, Signal, Telegram जैसे ऐप पर रजिस्टर करता है तो, उसे एक साल की जेल या 50,000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। साथ ही उसकी दूरसंचार सेवा निलंबित कर दी जाएगी।

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बीते सालों में सामने आए कई मामले

दूरसंचार विभाग (DoT) के अनुसार, बीते कुछ सालों के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा बहुत सी धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियां सामने आई हैं, इन मामलों में ज्यादातर मामले फर्जी दस्तावेजों से सिम लेने के थे। इसके साथ ही अपनी वास्तविक पहचान छुपा कर फर्जी पहचान के साथ ओटीटी प्लेटफार्म पर रजिस्टर करने के मामले भी देखे गए हैं। वहीं, ताजा बिल के मुताबिक, सभी दूरसंचार यूजर्स को पता होना चाहिए कि कौन कॉल कर रहा है।

क्या करेगा यह नया नियम

दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा लाए गए इस नियम के माध्यम से दूरसंचार सेवाओं का उपयोग करके किए गए साइबर फ्रॉड को रोका जा सकेगा। क्योंकि, जब सभी सिम कार्ड KYC किए हुए होंगे। तो आपराधिक गतिविधियां अपने आप कम हो जाएंगी। बता दें कि सरकार ने KYC को अनिवार्य कर दिया है। इतना ही नहीं आने वाले समय में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करने के लिए भी यूजर्स को KYC प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। वहीं, यदि इस ड्राफ्ट को मंजूरी मिल जाती है तो ऑनलाइन और कॉल धोखाधड़ी के मामलों में काफी गिरावट देखने को मिलेगी। जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि KYC होने से सभी को पता चल जाएगा कौन कॉल कर रहा है।

केंद्रीय संचार मंत्री का कहना

इस मामले में भारत के केंद्रीय संचार मंत्री Ashwini Vaishnav का कहना है कि, “यदि  किसी के पास कोई कॉल आता है तो उसे पता होना चाहिए कि, कॉल कौन कर रहा है। इसमें सभी प्रकार की कॉल शामिल हैं, चाहे वह सामान्य वॉयस कॉल हो, व्हाट्सएप कॉल हो, फेसटाइम हो या कोई अन्य ओटीटी कॉल।

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अंकित ने पत्रकारिता की शुरुआत स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के रूप में की थी लेकिन तकनीकी के प्रति विशेष रुझान इन्हें Mysmartprice हिंदी में लेकर आया है। पत्रकारिता के दौरान इन्होंने एक चीज बखूबी सीखा है और वह है आसान भाषा में लोगों को सटीक जानकारी देना। और यही खूबी इन्हें दूसरों से अलग बनाती है। यहां अंकित मोबाइल और तकनीक के साथ ऑटोमोबाइल्स सेग्मेंट को भी कवर करते हैं। पत्रकारिता में इन्हें 5 साल से ज्यादा का अनुभव है जहां इन्होंने राज एक्सप्रेस, थिंक विथ नीश, स्टेट न्यूज और बंसल न्यूज जैसे आर्गेनाइजेशन में अपना योगदान दिया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्यूनिकेशन से मास्टर डिग्री ली है। साथ ही टाइम्स ग्रुप से बैंकिंग मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी किया है।