हेलमेट पर नए नियम: भारत में Non-ISI helmet बेचने पर अब लगेगा 5 लाख रुपये तक का जुर्माना

अगर आप एक नकली, और Non-ISI  हेलमेट का इस्तेमाल कर रहे हैं या बेच रहे हैं तो इस रिपोर्ट पर जरूर गौर करें। हम सब जानते हैं कि देश में हेलमेट कीक्वालिटी को लेकर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं। कुछ हेलमेट निर्माता कंपनियों को छोड़कर बाकी सेंकड़ों ऐसी लोकल हेलमेट कंपनियां हैं जो Non-ISI हेलमेट, या नकली हेलमेट बना कर खूब बेच रही हैं। लोग भी सस्ते के चक्कर में लोकल और घटिया हेलमेट को खरीद लेते हैं और बाद हे एक्सीडेंट में वो अपनी जान गंवा देते हैं।

देश में बिना ISI (आईएसआई) मानक वाले हेलमेट के इस्तेमाल पर एक जून 2021 से पूरी तरफ प्रतिबंध लग गया है। नए  नियम के मुताबिक अगर कोई बिना ISI मार्क वाले हेलमेट को बेचता है या खरीदता है तो दोनों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यानी अब टू-व्हीलर  चलाने वालों के लिए ISI मार्का वाले हेलमेट अनिवार्य हो गया है। यह हेलमेट BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) सर्टिफाइड होना चाहिए।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा 26 नवंबर, 2020 को जारी अधिसूचना “दोपहिया मोटर वाहन सवारों के लिए हेलमेट (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2020” में कहा गया है कि सभी दोपहिया वाहनों में उपयोग किए जाने वाले हेलमेट भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणित होने चाहिए और एक जून से उन पर भारतीय मानक (ISI) का चिह्न लगा होना चाहिए।

5 लाख रुपये तक का जुर्माना

इस फैंसले के साथ भारत सरकार ने सड़क पर टू-व्हीलर राइडर्स की सेफ्टी को बेहतर करने की कोशिश की है। नए कानून का पालन न करने पर सख्त कदम उठाने और उल्लंघन करने वालों को दंड भी दिया जायेगा। कोई भी व्यक्ति बिना ISI मार्क वाले हेलमेट का निर्माण, भंडारण, बिक्री या आयात करता है, तो उसे एक साल तक की कैद या न्यूनतम एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है जो कि 5 लाख रुपये तक बढ़ाया भी जा सकता है। 

इतना ही नहीं देश में सिर्फ BIS/ISI सर्टीफिकेशन वाले हेलमेट ही बेचने की इजाजत होगी। यानी अब देश में बिना ISI मार्क वाले हेलमेट बनाने और बेचने पर जेल की सजा होगी क्योंकि अब यह अपराध है । सरकार के इस शानदार कदम की वजह से  नकली हेलमेट की बिक्री को खत्म करना और हल्की क्वालिटी वाले हेलमेट के कारण होने वाली घातक दुर्घटनाओं के आंकड़ों को कम करना होगा। 

खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

मार्किट में हर रंग और डिजाइन के हेलमेट मौजूद हैं, ऐसे में आप अपनी जरूरत के मुताबिक हेलमेट चुनें। हेलमेट का वाइजर कभी गहरे रंग का नहीं होना चाहिये क्योंकि इससे रात में दिक्कत होती है। हेलमेट खरीदते समय ध्यान रखें, अगर हेलमेट कहीं से टूटा हुआ हो, तो लेने से बचें। अच्छी क्वालिटी के वाइजर वाले हेलमेट खरीदें, ताकि आंखों पर भारीपन न महसूस हो। साथ ही, उसी हेलमेट को प्राथमिकता दें, जिसके अंदर की फोम की लाइनिंग आसानी से बाहर निकल जाती हो, ताकि इन्फेक्शन से बचने के लिये आप उसे हफ्ते में एक बार धोकर दोबारा इस्तेमाल कर सकें।

नकली हेलमेट की पहचान ऐसे करें

स्टीलबर्ड हेलमेट के एमडी, राजीव कपूर  के मुताबिक, आज देश में करीब 80 प्रतिशत नकली और लोकल हेलमेट बिक रहे हैं। लेकिन इनकी पहचान करना बेहद आसान है, अगर कोई आपको 450 रुपये से कम में हेलमेट बेच रहा है, तो समझ जाएं कि आप एक नकली हेलमेट खरीद रहे हैं। क्योंकि कोई भी ISI मार्क वाला हेलमेट इतनी कम कीमत में नहीं बन सकता। सरकार के सुरक्षा मानकों  के मुताबिक एक ISI मार्क वाले हेलमेट को बनाने में ही न्यूनतम लागत 450 रुपए आती है।