किसान आंदोलन से जियो को भारी नुकसान, कई ने बंद की Jio की सिम, 2,000 टावरों में भी तोड़फोड़

केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। किसान टिकरी बॉर्डर से लेकर सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर लगभग 1 महीने से ज्यादा समय से बैठे हैं और अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। जो युवा और किसान, आंदोलन में शामिल नहीं हो सके हैं और अपने घरों में हैं वहां वो मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचा कर अपना विरोध जता रहे हैं। दरअसल मोदी सरकार द्वारा बनाए गए इन कृषि कानूनों को रिलायंस जियो के मालिक मुकेश अंबानी और उद्योगपति अडाणी को फायदा पहुंचाने वाला कानून बताया जा रहा है। ऐसे में कृषि कानूनों का विरोध कर रहे लोग जियो टावरों की लाइट काट रहे हैं और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को तोड़ रहे हैं। किसानों के प्रदर्शन का आज 35 वां दिन है।

मुख्यमंत्री की अपील का भी नहीं हुआ कोई असर
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई-TRAI) के अनुसार पंजाब में 3.9 करोड़ मोबाइल यूजर्स हैं। इनमें से लगभग डेढ़ करोड़ यूजर्स रिलायंस जियो के हैं।
पंजाब में आंदोलन के दौरान अब तक रिलायंस जियो के लगभग 2,000 मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने टावरों को नुकसान पहुंचा रहे लोगों से ऐसा न करने की अपील भी की और कार्रवाई करने की चेतावनी भी जारी की लेकिन इन बातों का कोई खास असर हुआ नहीं।

मंगलवार को सेलुलर आपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओआईए) ने भी टावरों में तोड़फोड़ से संपर्क व्यवस्था के चरमरा जाने की आशंका जताई और चिंता जाहिर की है। सीओएआई रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन- आइडिया जैसी कंपनियों की एसोसिशन है।

एयरटेल, वोडा-आइडिया और रिलायंस जियो जैसी टेलीकॉम कंपनियों की साझा एसोसियेशन सीओएआई और टावर कंपनियों के संगठन, टावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर एसोसिएशन (टीएआईपीए) भी पंजाब में टावर को नुकसान न पहुंचाने की अपील कर चुके हैं।

कई लोगों ने बंद किया जियो सिम का इस्तेमाल
वहीं रिलायंस जियो कुछ दिनों में तोड़फोड़ के कारण खराब हुए टावरों की मरम्मत का कार्य भी काफी तेजी से कर रहा है। सूत्रों के अनुसार मंगलवार शाम तक कुल 826 मोबाइल टॉवर डाउन थे। पंजाब में जियो के लगभग नौ हजार टावर हैं। हालांकि किसान भले ये सोच रहे हैं कि वो रिलायंस जियो के टावर को तोड़कर मुकेश अंबानी को नुकसान पहुंचा रहे हैं लेकिन एक सच यह भी है कि रिलयांस इंडस्ट्रीज ने सितंबर 2020 में जियो के टावर संपत्ति का बड़ा हिस्सा कनाडा की ब्रुकफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स एलपी को बेच दिया था। यह डील 25,215 करोड़ रुपये में हुई थी। यह बात जरूर है कि टॉवर भले ही किसी कंपनी को बेच दिया गया हो लेकिन जब नेटवर्क नहीं होगा और टॉवर काम नहीं करेंगे तो लोग जियो की सिम की जगह दूसरी कंपनी एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया की सिम इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे। अंत में नुकसान जियो को ही पहुंच रहा है।

जियो कर चुका है शिकायत
इससे पहले जियो ट्राई से शिकायत कर चुका है कि उसकी प्रतिद्वंदी कंपनियां एयरटेल, वोडाफोन-आईडिया किसान आंदोलन का फायदा उठा रहे हैं और जियो के ग्राहकों को अपनी तरफ खींच रहे हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं आया है लेकिन कहा जा रहा था कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लगभग 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने रिलायंस जियो से अपना नंबर पोर्ट कर दूसरी एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया की सर्विस यूज करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही लोग जियो के पेट्रोल पंप का बहिष्कार करने की भी बात कर रहे हैं और कई जगह तो इसका बहिष्कार हुआ भी है।