Vodafone-Idea पर हुआ सरकारी कब्ज़ा, कर्ज में डूबी थी कंपनी

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इंडियन टेलिकॉम कम्पनीज में पहले नंबर रिलायंस जिओ और एयरटेल आते हैं। इसके बाद तीसरे पायदान पर वोडाफ़ोन आईडिया का नंबर आता है। जब IDEA और Vodafone टेलीकॉम कम्पनीज मर्ज हुई तब ऐसा लेग रहा था मानो अब टेलीकॉम ऑपरेटिंग सिस्टम में वोडाफ़ोन सभी बड़ी कंपनियों को पछाड़ कर सबसे शीर्ष स्थान पर आ जाएगा। परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। वोडाफ़ोन आईडिया कंपनी को लगातार नुक्सान होता जा रहा है। ऐसी भी खबरें सुनने में आ रही है कि Vodaphone Idea (Vi) कंपनी पर बढ़ते सरकारी कर्जे के चलते वोडाफ़ोन आईडिया टेलीकॉम ऑपरेटिंग सिस्टम का एक बड़ा शेयर इंडियन गवर्नमेंट के हाथों में आ गया है। ऐसे में अगर घाटे में चल रही वोडाफोन-आइडिया टेलीफोन कंपनी बंद हो गयी तो सबसे बड़ा नुक्सान इंडियन गवर्नमेंट को होगा, ऐसा अनुमान है कि ये नुक्सान 1.60 लाख करोड़ रुपये तक का हो सकता है।

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वोडाफ़ोन आईडिया हुई सरकारी

पूरा वाकया क्या है और कैसे वोडाफ़ोन आईडिया पर कैसे सरकार का कब्ज़ा हुआ, आइए बताते हैं। वोडाफ़ोन आईडिया ने सरकार से कर्ज लिया हुआ था और उसे स्पेक्ट्रम ऑक्शन के बाद सरकार को एक तय राशि देनी थी लेकिन वोडाफ़ोन इस किश्त को देने में विफल हुई। ऐसे ही कई किश्तें न चुका पाने के कारण उन पर कर्ज बढता ही जा रहा था। उन पर सिर्फ कर्ज ही नही बढ़ रहा था बल्कि उससे जुड़ने वाले यूजर्स की संख्या भी कम होती जा रही थी जिससे मार्किट में उनकी हालत और खस्ता होती गयी। ऐसे में मुनाफा धीरे धीरे ख़तम हो गया और उन पर सरकारी कर्ज कई गुना बढ़ गया। ऐसे हालातो में सरकार ने वोडाफ़ोन आईडिया कंपनी के बड़े  हिस्से को टेकओवर कर लिया। इसे भी पढ़े – Airtel vs Jio vs Vi: 500 रु से कम में ये हैं बेस्ट अनलिमिटेड Prepaid Plans

सरकार चलाएगी Vodafone Idea

इंडियन गवर्मेंट का कर्ज वापिस न चुका पाने के कारण सरकार का उसके एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्ज़ा हो गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि वोडाफ़ोन आईडिया के 35.8% हिस्से पर सरकारी कब्ज़ा है। इसका सीधा सा अर्थ ये हैं कि सरकार अपने हिस्से का अपने हिसाब से कुछ भी इस्तेमाल कर सकती है। वो चाहे तो अपना हिस्सा किसी और कंपनी को बेच भी सकती है। अगर ऐसा हुआ तो हो सकता है कि वोडाफ़ोन आईडिया पर जल्द ही किसी दूसरी टेलिकॉम कंपनी का कब्ज़ा हो।

कंपनी में सरकार के इतने बड़े हिस्से की वजह से कंपनी को अपने मुनाफे का 35.8% हिस्सा सरकारी खाते में जमा करना होता है, बाकि आदित्य बिरला ग्रुप के हिस्से में 17.8% और वोडाफ़ोन के हिस्से 28.5% कमाई आती है।

संभावनाएं

ऐसी भी सम्भावना जताई जा रही है कि सरकार अपने हिस्से को सरकारी टेलिकॉम ऑपरेटिंग कंपनी बीएसएनएल या एम्टीएनल से मर्ज कर देगी। अगर ऐसा हुआ तो  ये सरकारी कंपनी बड़ी बड़ी टेलिकॉम कम्पनीज को टक्कर देने में सक्षम हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योकि सरकार का 35.8% मर्ज होने के बाद सरकारी टेलिकॉम कम्पनी के यूजर्स में काफी बड़ा उछाल आएगा। ये भी सम्भावना है कि वोडाफ़ोन आईडिया के 4G Spectrum के चलते सरकार बीएसएनएल यूजर्स को भी 4 जी सर्विस देने लग जाएगी। हालाँकि ये अभी सिर्फ उडती खबरे हैं, इस विषय में सरकार की और से कोई अधिकारिक पुष्टि नही की गयी है।इसे भी पढ़े: Airtel vs Jio vs Vi : कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब इन प्लान्स में मिलेंगे Disney+ Hotstar, Prime Video मुफ्त