स्मार्टफोन का अनचाहा इस्तेमाल हमारी सेहत से कर रहा है खिलवाड़, जानिए कैसे!

स्मार्टफोन हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। हम सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक इसे सीने से लगाए रखते है लेकिन क्या आप जानते हैं इस तरह स्मार्टफोन का अनचाहा इस्तेमाल हमें धीरे धीरे बीमार कर रहा है! जी हां, इसमें कोई दो राय नहीं कि इसकी वजह से दुनिया सही मायनों में एक ग्लोबल विलेज बन गई है क्योंकि दुनिया भर की पल-पल की खबर हम अपने फ़ोन से जान सकते हैं लेकिन इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि ये छोटा सा उपकरण कितना भी शानदार क्यों ना हो, लेकिन इसकी वजह से लोग पास रह कर भी दूर होते जा रहे हैं। आज बिना सोचे-समझे किया जा रहा तकनीक का इस्तेमाल समाज के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है।

तो इसी कड़ी में, हाल ही में Vivo द्वारा किए गए एक रिसर्च में पता चला है कि एक औसत भारतीय रोजाना अपने फोन पर लगभग 7 घंटे खर्च करता है। इसीलिए, अपने #SwitchOff कैंपेन के दूसरे एडिशन के साथ Vivo ने यूजर्स को इस तरह टेक्नोलॉजी के अर्थहीन उपयोग और उसके मानव-व्यवहार और संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जागरूक करने का फैसला किया है। इसके अलावा, रिसर्च में और भी कई खुलासे किए गए हैं। तो आइए एक नजर डालते हैं Vivo के रिसर्च “स्मार्टफ़ोन और उनके संबंधों पर प्रभाव” में सामने आए कुछ खास पॉइंट्स पर:

स्लीपिंग डिसऑर्डर (सोने में परेशानी)

इस रिसर्च में ये पाया गया है कि सोने से पहले अपने स्मार्टफोन का उपयोग करने से इसमें से निकलने वाली नीली रोशनी की वजह से सोने में कठिनाई होती है। इसके अलावा, रिसर्च में ये भी पता चला है कि 73% लोग अपने फोन को बार-बार देखने की आदत से जूझ रहे हैं और चाह कर भी इस लत से छुटकारा नहीं पा सकते। इसके अलावा, इंटरनेट पर मिलने वाली कोई ग़लत जानकारी या कोई चिंताजनक बात सीधे तौर पर आपके दिल और दिमाग को प्रभावित करती है।

चिड़चिड़ा मूड

रिसर्च में ये बात भी सामने आई है कि 74% लोग अपने फोन का उपयोग नहीं करने पर मूडी और चिड़चिड़े हो जाते हैं। फोन को चार्ज करते समय या फोन के खराब होने की हालत में युवाओं में गुस्सा और बेसब्री की भावना बढ़ने लगती है जिनसे उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। इसका ताज़ा उदाहरण है – आजकल हम अक्सर देखते हैं कि बच्चों के स्वभाव में गुस्सा और चिड़चिड़ापन आता जा रहा है, इसकी बड़ी वजह फोन का ज़रूरत से ज़्यादा उपयोग ही है।

फोन की वजह से गिल्ट (अपराध की भावना)

अपने फोन का अर्थहीन उपयोग करने की वजह से 68% लोग गिल्ट महसूस करते हैं लेकिन इसकी लत लगने की वजह से वे खुद को रोक नहीं पाते। इससे ना केवल वे आपके परिजनों और दोस्तों से दूर होते चले जाते है बल्कि अपने कीमती समय को यूं ही बर्बाद कर देते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान पर असर

रिसर्च में ये भी पाया गया कि स्मार्टफोन के वर्तमान औसत उपयोग से 70% लोगों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि कंपीटीशन के इस दौर में हर किसी पे एक दूसरे से आगे निकलने का दबाव है और सोशल मीडिया ने इस दबाव को दोगुना कर दिया जाता है जहां लाइक्स और फॉलोअर्स बेहद अहम हो जाते हैं। तो अपने फ़ोन से किसी सोशल मीडिया साइट पर पोस्ट करने के बाद बार-बार पेज रिफ्रेश करके देखना हमारे मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान पर पड़ रहे स्मार्टफोन के खतरनाक प्रभाव को ही उजागर करता है।


सत्यव्रत का मानना है कि टेक्नॉलजी का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना जानेंगे. इसी के चलते उन्होंने टेक जर्नलिस्ट बनने का फैसला लिया. सत्यव्रत ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की थी, साल 2015 में वह ज़ी न्यूज़ से जुड़े. वह न केवल टेक को अच्छी तरह से समझते हैं बल्कि यह भी जानते हैं कि कौन सी स्टोरी पाठकों को ज्यादा पसंद आती हैं. अब सत्यव्रत Mysmartprice से जुड़े हैं. और यहां भी उनका मकसद हर रोज बदल रही टेक्नॉलजी की दुनिया की हर बारीकी को आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाना है.