स्मार्टफोन खरीदने जा रहे हैं, ऐसे चेक करें कि कहीं नकली या चुराया हुआ तो नहीं

जितना ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ा है उतनी ही इससे जुड़ी कालाबाज़ारी और धोखाधड़ी भी बढ़ गई है, तो अगर आप कोई सेकेंड हैंड या नया फोन खरीद रहे हैं तो कुछ बातों को फॉलो करके किसी की धोखेबाज़ी से बच सकते हैं।

1.      IMEI नंबर की जांच करें- हर फोन का एक 15 नंबर वाला IMEI नंबर होता है जो हर फोन में होता है. बिना IMEI नंबर वाले फोन बेचना गैरकानूनी है, तो जब भी आप फोन खरीदने जाएं तो सबसे पहले इस नंबर को चेक करें। इसके लिए आप फोन पर *#06# डायल करें। जैसे ही आप इसे डायल करेंगे स्क्रीन पर वो 15 नंबर वाला IMEI नंबर फ्लैश होने लगेगा, अगर ऐसा नहीं होता तो समझ जाइए कि ये फोन नकली है।

2.      बिल की जांच करें- अगर आप फोन पर IMEI नंबर नहीं देख पाते हैं तो आपको मिलने वाले बिल पर इसका उल्लेख जरूर होता है तो बिल मिलते ही पहले आप फोन का IMEI नंबर देखें। अगर वो नंबर उस पर लिखा है तो आप सुरक्षित हैं और अगर ऐसा नहीं है तो अच्छा होगा कि आप उस फोन को ना खरीदें।

3.      Central Equipment Identity Register वेबसाइट खोलें- जैस ही आपको फोन का IMEI नंबर मिल जाता है तो उसके बाद आप Central Equipment Identity Register की वेबसाइट पर जाएं और वेरिफिकेशन के ऑप्शन पर क्लिक करें, आपको यहां फोन का IMEI नबंर का वेरिफिकेशन करना है। कई बार फोन के IMEI नंबर बंद कर दिए जाते हैं और उन नंबर का इस्तेमाल कर नकली फोन भी बेचे जाते हैं तो वेरिफिकेशन से आपको फोन के IMEI नंबर का स्टेटस पता चल जाएगा।

4.      इन तीन तरह के IMEI नंबर वाले फोन ना खरीदें- अगर IMEI नबंर के वेरिफिकेशन के दौरान आपको “ब्लैक लिस्टेड, डुप्लीकेट और पहले से ही इस्तेमाल में है” जैसे स्टेटस दिखाई देते हैं तो आप इस तरह के IMEI नंबर का फोन ना खरीदें। क्योंकि इससे आप बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं।

5.      SMS से करें IMEI नंबर वेरिफाई- आप अपने फोन से SMS करके भी IMEI नंबर को वैरिफाई कर सकते हैं। आपको बस अपने फोन पर “KYM 15 नंबर का IMEI नंबर” टाइप करके 14422 पर भेज देना है।

6.      IMEI नंबर सुनिश्चित करने के लिए ऐप भी है मौजूद- IMEI नंबर को जांचने के लिए ऐप भी मौजूद है जिसे आप अपने प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। Centre for Development of Telematics (C-DOT) ने “KYM-KNOW YOUR MOBLIE ” नाम की एक ऐप भी लॉन्च की है जिसका इस्तेमाल कर अपने फोन की पूरी जानकारी ले सकते हैं।

7.      Central Equipment Identity Register कैसे काम करता है- Central Equipment Identity Register  का निर्माण मोबाइल फोन में होने वाली जालसाजी को रोकने के लिए हुआ है। Central Equipment Identity Register हर फोन पर पूरी नज़र रखती है और किसी भी तरह से फोन में होने वाली हेराफेरी को पकड़ लेती है। ये अपना डाटा सबसे शेयर करती है और ब्लैक लिस्टेड नंबर के बारे में सबको बताती है ताकी उस नंबर से कोई फोन बाजार में बिक ना सके।

तो ये हुई कुछ ऐसी जानकारी जो आपको किसी मुसीबत में फंसने से बचा सकती है, फोन इस वक्त इंसान की पहचान बन गया है तो अच्छा होगा कि आप अपनी पहचान को साफ-सुथरा रखें। अपने फोन को किसी भी संदिग्ध इंसान से जुड़ने से बचाएं, खुद को सुरक्षित रखें और फोन खरीदते समय इन बातों का खास ख्याल रखें।


सत्यव्रत का मानना है कि टेक्नॉलजी का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना जानेंगे. इसी के चलते उन्होंने टेक जर्नलिस्ट बनने का फैसला लिया. सत्यव्रत ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की थी, साल 2015 में वह ज़ी न्यूज़ से जुड़े. वह न केवल टेक को अच्छी तरह से समझते हैं बल्कि यह भी जानते हैं कि कौन सी स्टोरी पाठकों को ज्यादा पसंद आती हैं. अब सत्यव्रत Mysmartprice से जुड़े हैं. और यहां भी उनका मकसद हर रोज बदल रही टेक्नॉलजी की दुनिया की हर बारीकी को आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाना है.