टूटी हुई स्क्रीन के साथ फ़ोन इस्तेमाल कर रहे हैं तो हो सकते हैं ये नुकसान

जब तक स्मार्टफ़ोन नहीं आए थे और आप नॉर्मल फ़ोन इस्तेमाल करते थे तब तक फ़ोन का गिर जाना उतनी बड़ी बात नहीं थी. आजकल जब हाथ से आपका फ़ोन छूटता है तो आपको ‘मिनी हार्ट अटैक’ आ जाता है.

स्मार्ट फ़ोन की स्क्रीन ज्यादातर कांच या फिर ऐक्रेलिक से बनी होती है जो सामान्य से ज्यादा झटका लगने पर टूट जाती है. हालांकि आजकल कई तरह के दावे किए जाते हैं और टेक्नोलॉजी में भी बदलाव किया गया है जिससे स्मार्टफ़ोन की स्क्रीन जल्दी नहीं टूटती है, फिर भी कभी ना कभी स्क्रीन टूट ही जाती है.

पर सवाल ये है कि क्या आप स्क्रीन टूटने के बाद भी फ़ोन को इस्तेमाल करते हैं.अगर आपका जवाब हां है तो आपको समस्या का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि टूटी हुई स्क्रीन का इस्तेमाल करने के क्या रिस्क हैं-

स्क्रीन मालफंक्शन:

अगर फ़ोन की स्क्रीन क्रैक हो गई है तो सबसे बड़ी समस्या टच पैनल में आती है. आपके टच करने के बाद फ़ोन के प्रतिक्रिया देने के समय में देरी आने लगती है और धीरे धीरे ये परेशानी बढ़ती जाती है. कई बार ऐसे में फ़ोन का एक साइड काम करता है और दूसरा हिस्सा काम करना बंद कर देता है.

फ़ोन की सुरक्षा में कमी:

आपके फ़ोन की स्क्रीन सिर्फ आपके फ़ोन को ऊपर से नहीं बल्कि अंदर से भी प्रोटेक्ट करती है. टूटी हुई स्क्रीन से फ़ोन के अंदरूनी हिस्से में बड़ी आसानी से धूल मिट्टी घुस सकती है और आप उसे किसी भी गीले कपड़े या सामान्य कपड़े से साफ़ भी नहीं कर पाते हैं, इसलिए जितना जल्दी हो सके टूटी हुई स्क्रीन की रिपेयर करवाने की सलाह दी जाती है.

उंगलियों के चोटिल होने की आशंका:

हालांकि यह हमेशा नहीं होता है पर फिर भी इसकी आशंका हमेशा रहती है. कभी कभी उभरी हुई स्क्रीन से नुकीला हिस्सा आपकी उंगलियों में चुभ कर आपको चोट पहुंचा सकता है. हमेशा क्रैक स्क्रीन में छोटे छोटे कांच के टुकड़ों का ध्यान रखें.

आंखों पर असर पड़ना:

स्मार्टफ़ोन में आपको हाई डेफिनिशन डिस्प्ले की सुविधा दी जाती है जिससे आंखों पर गलत असर नहीं पड़ता है, लेकिन अगर स्क्रीन टूट गई है तो क्रैक में से निकलने वाली रेडिएशन से आंखों पर गलत असर पड़ता है.

आपकी क्षमता में कमी:

स्क्रीन टूटने से ना सिर्फ फ़ोन की परफॉरमेंस में कमी आती है बल्कि ये आपके काम करने की स्पीड और परफॉरमेंस पर भी गलत असर डालता है. साथ ही इसमें से निकलने वाली रेडिएशन सीधे आप तक पहुंचती है जो हानिकारक है.

आजकल लगभग सभी फ़ोन कंपनी स्क्रीन को लेकर गारंटी या किसी ना किसी तरह का बीमा देती हैं. जब भी फ़ोन की स्क्रीन टूटे तो फटाफट से अपने नजदीकी फ़ोन सेंटर पर जाकर स्क्रीन बदलवा लेना ही सही निर्णय है. हालांकि कभी कभी हम पैसे या समय की कमी के चलते इसे बदलवाने में देरी करते हैं पर अब आप खुद ही जान गए हैं कि ये आपके और आपके फ़ोन दोनों के लिए ही काफी ज्यादा नुकसानदायक है.


सत्यव्रत का मानना है कि टेक्नॉलजी का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना जानेंगे. इसी के चलते उन्होंने टेक जर्नलिस्ट बनने का फैसला लिया. सत्यव्रत ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की थी, साल 2015 में वह ज़ी न्यूज़ से जुड़े. वह न केवल टेक को अच्छी तरह से समझते हैं बल्कि यह भी जानते हैं कि कौन सी स्टोरी पाठकों को ज्यादा पसंद आती हैं. अब सत्यव्रत Mysmartprice से जुड़े हैं. और यहां भी उनका मकसद हर रोज बदल रही टेक्नॉलजी की दुनिया की हर बारीकी को आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाना है.