विंडो या स्पिलिट, इन्वर्टर या नॉन इन्वर्टर? कौनसा AC है बेस्ट? सारे सवालों के जवाब यहां

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एसे चुनें बेस्ट एसी

गर्मियों का मौसम आ गया है और लोग एसी या कूलर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। अगर आप भी अपने घर या ऑफिस के लिए कोई अच्छा सा एसी (AC) या कूलर खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपको कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। हमने आपको अपनी पिछली रिपोर्ट में कूलर खरीदते समय ध्यान में रखी जाने वाली बातों के बारे में बताया था। आप यहां क्लिक कर वो रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको एक अच्छा एयर कंडिशनर खरीदते वक्त ध्यान में रखी जाने वाली सावधानियां बता रहे हैं। अगर आप एसी खरीदते वक्त इन बातों का ध्यान रखेंगे तभी एक अच्छा एसी खरीद पाएंगे, तो चलिए आपको बताते हैं….

कमरे के हिसाब से सही एसी का चुनाव करें
सबसे पहले आप अपने कमरे के हिसाब से एसी का चुनाव करें। आप तय करें कि आप स्पिलिट एसी (Split AC) लेना चाहते हैं या फिर विंडो एसी (Window AC)। इसके लिए आप देखें कि आपके कमरे में कोई खिड़की है या नहीं? अगर आपके कमरे में वेंटिलेशन के लिए एक खिड़की है जहां आप आराम से एसी सेट कर सकते हैं तो आप विंडो एसी लें। अगर आपका कमरा पूरा पैक है तो आप स्पिलिट एसी की ओर जाएं। आजकल विंडो एसी कम चलन में हैं। लोग स्पिलिट एसी का चुनाव कर रहे हैं।

कमरे की साइज के हिसाब से करें टन का चुनाव
एसी का प्रकार तय करने के बाद आप कमरे के हिसाब से एसी का टन चुनिए कि आपको कितने टन का एसी लेना है। एसी 1 टन, 1.5 टन, 2 टन, 3 टन में आते हैं। टन से मतलब है कि अगर आप अपने कमरे में 1 टन बर्फ रख दें तो आपके कमरे में जितनी ठंडक होगी, उतनी ही ठंडक 1 टन का एसी देगा। यानी जितने अधिक टन, उतनी जल्दी कमरा ठंडा लेकिन ऐसा ना हो कि आपका कमरा छोटा है और आपने एसी ज्यादा टन का ले लिया। इससे आपका बिल भी अधिक आएगा और एसी भी ज्यादा काम नहीं आएगा। औसत की बात करें तो अगर आपका कमरा 100 वर्ग फुट का है तो आप 1 टन से कम का एसी लें। 100 से 150 वर्ग फुट के बीच है तो आप 1 टन का एसी लें। 150 वर्ग फुट से 200 वर्ग फुट तक है तो आपको 1.5 टन का एसी लेना चाहिए।

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ऐसे करें सही AC की चुनाव

उपभोग के हिसाब से करें सही स्टार्स का चुनाव
आजकल एसी पर स्टार्स की रेटिंग आती है। 2 स्टार, 3 स्टार, 5 स्टार। इसका मतलब है कि जो एसी जितने अधिक स्टार्स वाला होगा, वो उतनी ही कम बिजली खर्च करेगा। हालांकि ज्यादा स्टार्स वाला एसी उतना ही महंगा भी होता है। इसके लिए आपको अपने उपभोग को ध्यान में रखना है। अगर आप एसी का इस्तेमाल कम करते हैं तो आप कम स्टार्स वाला एसी ही ले लें। अगर आप एसी का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो आप ज्यादा स्टार्स वाला एसी लें। ये महंगा तो आएगा लेकिन आपकी इलेक्ट्रिसिटी काफी बचाएगा।

इन्वर्टर और नॉन इन्वर्टर एसी
नॉन इन्वर्टर एसी में कंप्रेशर तय टेंप्रेचर के बाद बंद हो जता है और फिर जैसे ही रूम का टेंप्रेचर बढ़ता है तो वो चालू हो जाता है। बार-बार कंप्रेशर के चालू और बंद होने से इलेक्ट्रिसिटी काफी ज्यादा लगती है और कंप्रेशर खराब होने के चांस भी ज्यादा होते हैं। वहीं इन्वर्टर एसी में कंप्रेशर बार-बार बंद नहीं होता बल्कि उसकी स्पीड स्लो हो जाती है। जैसे आपने 20° टेंप्रेचर सेट कर दिया तो जैसे ही रूम का टेंपरेचर 19° तक आएगा तो एसी का कंप्रेशर स्लो डाउन हो जाएगा। बंद नहीं होगा बल्कि स्पीड कम हो जाएगी। जैसे ही रूम का तापमान बढ़ेगा तो फिर कंप्रेशर तेजी से चलकर उसे 19-20° तक ले जाएगा।

कंडेनसर कॉइल का ध्यान रखें
एसी में दो तरह के कंडेनसर कॉइल आते हैं। एक एलुमिनियम और दूसरे कॉपर कॉइल। एलुमिनियम कॉइल का मेंटेनेंस महंगा है। इसकी लाइफ कम होती है और रिपेयरिंग भी काफी महंगी होती है। वहीं कॉपर कॉइल की लाइफ लंबी होती है। मेंटेनेंस भी सस्ता होता है और रिपेयरिंग भी काफी सस्ती होती है। ऐसे में हमेशा कॉपर कॉइल वाला एसी ही खरीदें। हालांकि कॉपर कंडेनसर वाले एसी थोड़े महंगे आते हैं लेकिन ये रिपेयरिंग में आपके काफी पैसे बचाते हैं।