
आजकल अनजान नंबरों से जैसे ही कोई कॉल आती है, लोग डर जाते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं स्पैम कॉल तो नहीं है। मगर अब ऐसे नंबरों से आने वाले कॉल को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब हर कॉलर का असली नाम मोबाइल फोन की स्क्रीन पर दिखाई देगी, चाहे वह नंबर आपके मोबाइल में सेव हो या फिर नहीं। दरअसल, भारत सरकार अब मोबाइल कॉलिंग को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने दूरसंचार विभाग (DoT) के एक नए प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसे Calling Name Presentation या CNAP कहा जा रहा है। खबरों के मुताबिक, इसे मार्च, 2026 से पूरे देश में लागू किए जाने की उम्मीद है। इस सिस्टम की बात करें, तो अब कॉल करने वाले व्यक्ति का रजिस्टर्ड नाम सीधे आपकी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगी यानी किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर पहले ही पता चल जाएगा कि कॉल किसने की है। भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए यह कदम मोबाइल कम्युनिकेशन को और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम सुधार माना जा रहा है।
सीनैप (CNAP) क्या है?

CNAP या Calling Name Presentation ऐसी टेलीकॉम सेवा है, जो कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम मोबाइल की स्क्रीन पर दिखाएगी। इसे Truecaller की तरह समझा जा सकता है, लेकिन फर्क यह है कि CNAP पूरी तरह से सरकारी और टेलीकॉम ऑपरेटर्स द्वारा ऑपरेट होने वाली प्रणाली होगी। TRAI ने 2022 में इस फीचर को लेकर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि इसे कैसे लागू किया जा सकता है। इसके बाद TRAI ने Airtel, Reliance Jio और Vodafone-Idea जैसी प्रमुख नेटवर्क कंपनियों के साथ मिलकर इस पर काम किया। अब TRAI ने अंतिम सिफारिशें जारी कर दी हैं। TRAI के अनुसार, नेटवर्क प्रोवाइडर्स को CNAP के लिए ग्राहक की पहचान उसी नाम से लेनी होगी, जो उन्होंने SIM कार्ड खरीदते समय अपने Customer Application Form (CAF) में दिया था यानी जिस नाम से आपका सिम कार्ड रजिस्टर्ड है, वही नाम कॉल करते समय दूसरे व्यक्ति की स्क्रीन पर दिखाई देगा। वहीं बिजनेस कनेक्शंस के मामले में कंपनियों को Preferred Name दिखाने का विकल्प दिया जाएगा, जैसे कि उनका ट्रेडमार्क नाम, जीएसटी रजिस्ट्रेशन नाम या कोई आधिकारिक रूप से पंजीकृत कंपनी नाम।
सीनैप कैसे काम करेगा
सीनैप का मुख्य उद्देश्य फोन कॉल को अधिक पारदर्शी बनाना है। अभी तक जब किसी अननॉन नंबर से कॉल आता है, तो फोन स्क्रीन पर सिर्फ नंबर दिखता है, लेकिन CNAP के आने के बाद उस नंबर से जुड़ा हुआ नाम भी साथ में दिखेगा। यह नाम आपके टेलीकॉम ऑपरेटर की डाटाबेस से रियल टाइम में निकाला जाएगा, जिसमें हर ग्राहक का नाम उनके KYC यानी Know Your Customer प्रोसेस के दौरान वेरिफाई किया गया होता है। जब कोई व्यक्ति कॉल करेगा, तो रिसीवर के नेटवर्क ऑपरेटर का सिस्टम CNAP डाटाबेस से तुरंत उस कॉलर का नाम निकालेगा और उसे फोन की स्क्रीन पर प्रदर्शित करेगा। यह प्रक्रिया कुछ ही सेकंडों में पूरी हो जाएगी और इसमें इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होगी। CNAP को सभी यूजर्स के लिए डिफॉल्ट रूप से एक्टिवेट किया जाएगा। हालांकि जिन लोगों को अपनी पहचान साझा नहीं करनी है, वे अपने मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क करके इस फीचर से बाहर निकल सकते हैं।
CNAM डाटाबेस
CNAP सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी टेलीकॉम कंपनियों को Calling Name (CNAM) नाम का एक डाटाबेस बनाना होगा। इस डाटाबेस में हर मोबाइल नंबर के साथ उसका वेरिफाइड नाम और जरूरी जानकारी सुरक्षित रूप से रखी जाएगी। यह जानकारी केवल कॉल रिसीव करने के समय ही इस्तेमाल की जाएगी, जिससे डाटा की प्राइवेसी बनी रहेगी। जब कोई कॉल की जाती है, तो रिसीवर की नेटवर्क कंपनी इस डाटाबेस से नाम निकालकर स्क्रीन पर दिखा देगी। इस पूरी प्रक्रिया में यूजर का व्यक्तिगत डाटा बाहर नहीं जाएगा, जिससे यह सिस्टम ऐप्स के मुकाबले अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।
सीनैप की तकनीकी चुनौतियां
Calling Name Presentation सिस्टम को शुरू करने से पहले दूरसंचार विभाग ने इसे कई भारतीय शहरों में टेस्ट किया था। ट्रायल 4G और 5G नेटवर्क्स दोनों पर किए गए। शुरुआती परीक्षणों में कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, जैसे कि कुछ ऑपरेटर्स के नेटवर्क को अपग्रेड की आवश्यकता है और पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को अपडेट करने की जरूरत है। हालांकि ट्रायल के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। टेस्ट से यह साबित हुआ कि सिस्टम सही तरीके से और स्थिरता से काम करता है और कॉलर की पहचान तुरंत दिखा सकता है। ट्रायल के बाद TRAI और DoT ने इसे मंजूरी दे दी है और अब टेलीकॉम ऑपरेटर्स इसके रियल लॉन्च की तैयारी कर रहे हैं।
CNAP और Truecaller में अंतर

CNAP और Truecaller दोनों ही कॉलर आइडेंटिफिकेशन सर्विस है, लेकिन इनके काम करने के तरीके में बड़ा फर्क है। Truecaller और इसी तरह की ऐप्स यूजर्स से मिली क्राउड-सोर्स्ड जानकारी पर आधारित होती हैं। इसका मतलब है कि यूजर ने जिस नाम से सेव किया है, वही दूसरे व्यक्ति को दिखाई देता है, जो कई बार गलत हो सकता है। वहीं CNAP की जानकारी टेलीकॉम कंपनियों के KYC-आधारित डाटाबेस से ली जाएगी। इसका डाटा Customer Application Form (CAF) में दी गई जानकारी पर आधारित होगा, जो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त आईडेंटिटी सर्टिफिकेट (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि) से सत्यापित होती है। इसलिए CNAP की जानकारी Truecaller जैसी ऐप्स की तुलना में कहीं अधिक सटीक और भरोसेमंद होगी। साथ ही, यह सिस्टम सीधे नेटवर्क लेवल पर काम करेगा, जिससे डाटा किसी थर्ड पार्टी ऐप के पास नहीं जाएगा और यूजर्स की प्राइवेसी सुरक्षित रहेगी। CNAP की मदद से यूजर्स को न सिर्फ सही जानकारी मिलेगी, बल्कि यह सिस्टम देशभर में स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल्स पर भी काफी हद तक रोक लगाएगा। यह कदम डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को एक नई दिशा देगा।
CNAP की लॉन्च टाइमलाइन
अभी CNAP की लॉन्च डेट आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन खबरों के मुताबिक, इसे मार्च, 2026 से पूरे देश में लागू किया जा सकता है। एक बार जब यह सिस्टम देशभर में शुरू हो जाएगा, तो भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा वेरिफाइड कॉलर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम होगा। यह न केवल डिजिटल फ्रॉड को कम करेगा, बल्कि यूजर्स का भरोसा भी बढ़ाएगा। TRAI और DoT का मानना है कि CNAP के जरिए फोन कॉल्स को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।


